अपडेटेड: 4 नवंबर 2026, शाम 10:40 बजे IST
दिवाली का मौसम आते ही घर-घर में दीप जलने लगते हैं। इसी श्रृंखला में भूत चतुर्दशी का दिन आता है, जिसे नरक चतुर्दशी, काली चौदस या छोटी दिवाली भी कहा जाता है। खासकर बंगाल, असम, ओडिशा और पूर्वी भारत में इस दिन को बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व कब है, दीपदान का सही समय क्या है और 14 दीपक क्यों जलाए जाते हैं – आइए विस्तार से समझते हैं।
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भूत चतुर्दशी 2026 की सही तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर, शनिवार को सुबह लगभग 10:48 बजे शुरू होगी और 8 नवंबर, रविवार को सुबह करीब 11:28 बजे समाप्त होगी।
अधिकांश परंपराओं और बंगाली पंचांग के अनुसार भूत चतुर्दशी का मुख्य दिन 7 नवंबर 2026 ही माना जाता है। इसी दिन शाम को 14 दीपक जलाए जाते हैं और पूर्वजों की याद में विशेष अनुष्ठान होते हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व का नाम | भूत चतुर्दशी / नरक चतुर्दशी |
| तिथि | 7 नवंबर 2026 (शनिवार) |
| चतुर्दशी तिथि शुरू | 7 नवंबर, सुबह 10:48 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 8 नवंबर, सुबह 11:28 बजे |
| दीपदान का मुख्य समय | सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल) |
| अगला दिन | दिवाली / काली पूजा (8 नवंबर) |
दीपदान का शुभ मुहूर्त और महत्व
इस दिन शाम को सूर्यास्त के समय दीप जलाना बहुत शुभ माना जाता है। 7 नवंबर 2026 को सूर्यास्त लगभग शाम 5:32 बजे के आसपास होगा। प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त से लगभग 7:56 बजे तक दीपदान किया जा सकता है।
मान्यता है कि इस रात पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं। 14 दीपक जलाकर हम उन्हें प्रकाश देते हैं और अशुभ शक्तियों से घर की रक्षा करते हैं। यमराज की प्रसन्नता के लिए भी दीपदान किया जाता है ताकि अकाल मृत्यु का भय दूर रहे।
कुछ प्रमुख बातें ध्यान रखें:
- घर के मुख्य द्वार, चारों कोनों, पूजा स्थल और खिड़कियों पर दीपक रखें।
- घी या तिल के तेल के दीपक ज्यादा शुभ माने जाते हैं।
- दीपक जलाने से पहले घर की अच्छी सफाई कर लें।
14 दीपक क्यों जलाए जाते हैं?
बंगाली परंपरा में इसे “चौद्दो प्रदीप” कहा जाता है। 14 दीपक 14 पीढ़ियों के पूर्वजों की याद में जलाए जाते हैं। साथ ही इस दिन 14 तरह के शाक (हरी सब्जियां) खाने की भी परंपरा है। इन शाकों के धोए पानी को घर के कोनों में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, ऐसा माना जाता है।
यह दिन सिर्फ डर का नहीं, बल्कि आशीर्वाद और सुरक्षा का भी दिन है। प्रकाश अंधकार पर विजय का प्रतीक है। भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की याद में भी इस दिन को महत्व दिया जाता है।
पूजा विधि और कुछ जरूरी टिप्स
सुबह जल्दी उठकर तेल-उबटन लगाकर स्नान करें। साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल पर गणेश जी, लक्ष्मी जी और यमराज का ध्यान करें। शाम को दीप जलाते समय इस मंत्र का जाप कर सकते हैं – “यम दीप दान” या साधारण रूप से “ॐ यमाय नमः”।
- घर में झाड़ू-पोंछा जरूर करें।
- बच्चों को भी दीप जलाने में शामिल करें।
- रात भर कुछ दीपक जलते रहने दें।
- अगले दिन दिवाली की तैयारी शुरू हो जाएगी, इसलिए सामान पहले से जुटा लें।
निष्कर्ष
भूत चतुर्दशी 2026 हमें याद दिलाती है कि जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता बनाए रखना कितना जरूरी है। 7 नवंबर को शाम के दीपों से घर रोशन करें, पूर्वजों को याद करें और परिवार के साथ खुशियां बांटें। सही तिथि और मुहूर्त का ध्यान रखकर पूजा करने से लाभ कई गुना बढ़ जाता है।
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शुभ भूत चतुर्दशी और शुभ दिवाली!